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पटना में वैदिक पंडित

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ओम जय जगदीश हरे , स्वामी! VishnuJi ki Aarti Om jai Jagdish Hare

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जय जगदीश हरे। . भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे। . जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। . सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओम जय जगदीश हरे। . मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी। . तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ओम जय जगदीश हरे। . तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। . पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ओम जय जगदीश हरे। . तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता। . मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ओम जय जगदीश हरे। . तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। . किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे। . दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। . अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ओम जय जगदीश हरे। . विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा। . श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥ ओम जय जगदीश हरे। . श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे। . कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ओम जय जगदीश हरे। . ...